मिलावट और महंगाई पर हास्य कविता । Poem on inflation and corruption

महंगाई  पर  कविता | मिलावट  पर कविता



    Introduction :

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    Poems :

    महंगाई


    Inflation

    ये कैसा हिंदुस्तान बन रहा है ?
    महंगाई के साथ बढ़ रहा है !!
    दाल का तो पता नही ,
    पर प्याज कही नही, है काट रहा ।।

    दिया है दिवाली है
    भूख की महामारी है,
    मिलावट सब पर भरी है
    हर पिता का जेब खली है।।

    महंगा हुआ फ़ोन यहाँ
    महंगा नकली मिठाई है ।
    नकली खोवा , नकली प्याज ,,
    हर घर के बच्चो ने खाई है ।।

    महंगाई तो बढ़ पड़ी है ,,
    सबकी खटिया खड़ी है ।
    नाजाने कितने दिनों से ये डायन
    हमारे घर के पीछे पड़ी है ।।

    जन गन मन के देवता ,
    ये सुनलो हमारी पुकार
    जात - पात की राजनीती को
    तुम दो थोड़ा हार ।
    बदसूरत महंगाई का तुम
    कर दो कुछ समाधान ।।

    डूबने से पहले ,
    तुम  बचा ली मेरा हिंदुस्तान ।।
    डूबने से पहले ,
    तुम  बचा ली मेरा हिंदुस्तान।।


    मिलावट 


    Milawat


    बना कलम दांडीव मेरा,
    और सारथी मेरा सोच बना ।
    मिलावटी जैसे कौरव से लड़ने
    में अकेला किस ओर चला।।

    आस पास जब देखा मैंने ,
    तब सोचा व्यर्थ  मेरी लड़ाई है ।
    सब मेल मिलावट के बने है
    तो फिर क्यों ये लड़ाई है।।

    जब हुई मिलावट oxygen - hydrogen की ,
    तब बना यहाँ का पानी है ।
    नमक भी कुछ अलग नही
    बस sodium और chlorine की ये  कहानी है ।।

    बिना मिलावट के प्रकृति में
    ये ज़िन्दगी बेकार है आज ,
    बिना मिलावट के प्रकृति में
    ये ज़िन्दगी बेकार है आज ।।


    Thanks for reading.!!

    Brief description :

    These poem is written wholeheartedly by our team to provoke and show you the mirror of today's most dangerous pandemic , which we are neglecting to stop and indirectly promoting such stuffs. These poems on मिलावट and महंगाई shows the present scenario .
    Hope you will understand the present situation and will act against मिलावट in stopping this from spreading its root in our mother earth and pure nature. Moreover, you will stop the wastage of basic stuffs so that it's price decreases and it reaches to poor and Poor's can also make the usage of everything, already they can try standard living once in their life.

    Hope you would have loved reading महंगाई पर हास्य कविता | मिलावट पर हास्य  कविता-these poems.

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